Indian Astrology Portal

Goddess Lakshmi Aarti Hindi - लक्ष्मी आरती

"Om Jai Lakshmi Mata" is the famous Aarti of Lakshmi which is sung at the end of worship. Here, you can read Mahalakshmi Aarti in Hindi starting with the lyrics "ॐ जय लक्ष्मी माता".

Lakshmi Mata is the Goddess of wealth, money, beauty, and prosperity. She is worshiped for good fortune, good luck and money related matters. She brings good luck and removes sorrows of devotees. She is the mother goddess of the universe and one of a Tridevi (Lakshmi, Parvati and Saraswati).

Deepavali is the biggest festival in India, and all Hindus and Jain people worship her on the night of Dipavali for getting grace and boon to removing bad fortune, bad luck and getting prosperity and money. Lakshmi Suktam and Shri Suktam are the great prayers of her. You can read "Om Jai Lakshmi Mata" Aarti song with the lyrics below.

Lakshmi Aarti Song and Lyrics - Laxmi Mata ki Aarti

She consorts with Lord Vishnu, and liable for caring of the universe according to Hinduism. She called Mahalakshmi, Sri, Kamla, Padma and Vishnupriya also. Lakshmi mounts on an elephant or owl, and holds the lotus in the hands. Her adobe is Vaikuntha or Ksheera Sagara. She appeared from the churn of Ksheera Sagara which did by deities and demons to getting the divine nectar.

Lakshmi Aarati - Laxmiji Aarti

Lakshmi Aarti - लक्ष्मी आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु धाता.
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु धाता.

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता,
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता.
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु धाता.

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता,
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता.
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु धाता.

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता,
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता.
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु धाता.

जिस घर में तुम रहतीं, सब सदगुण आता,
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता.
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु धाता.

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता,
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता.
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु धाता.

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता,
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता.
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु धाता.

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता,
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता.
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु धाता.