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Kali Aarti - Aarti of Mahakali in Hindi - काली आरती

This is the Kali Aarti in Hindi, which start from "Mangal Ki Seva, Sun Meri Deva", is the popular Aarti song of Goddess Kali. Performing the Kalika Aarti is an important ritual of Kaali Pooja.

Kali is the mother goddess of the world, and when she pleased, devotee gets the grace and Siddi of Kalika. She can give Vakya Siddi, the power of knowing past, present, and future and art of poetry, whenever she pleased.

Saint Ramkrishna Paramhans and Swami Vivekananda were great devotees of her. Mata Kali has an important role in the Tantra yoga and Kundalini Yoga.

Kali Aarti in Hindi - Kalika Aarti

Kali Short Bio
Kali represents the Darkness, she considers very cruel and fearful for demons and mercy full for the devotees. She has three eyes, and the black complexion. Kali name is known as black or Kaal (time). She is beyond the time, and her three eyes represent past, present, and future. She is known as Mahashakti and Mahavidhya, which is produced by Goddess Parvati, so known as the incarnation of Mata Parvati also. She has trident for destroying the evil things.

Mata Kali Aarti in Hindi - काली माता की आरती

Aarati of Mahakali in Hindi - काली आरती

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े, पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट करे ।
सुन जगदम्बा कर न विलम्बा, संतन के भण्डार भरे, संतन प्रतिपाली सदा खुशाली, जय काली कल्याण करे ।
बुद्वि -विधाता तू जग माता, मेरा कारज सिद्व करे, चरण कमल का लिया आसरा, शरण तुम्हारी आन परे ।
जब -जब भीड़ पड़े भक्तन पर, तब -तब आय सहाय करे, बार -बार ते सब जग मोहयो, तरूणी रूप अनूप धरे ।
माता होकर पुत्र खिलावे, भार्या होकर भोग करे, संतन सुखदाई सदा सहाई, संत खड़े जयकार करे ।
ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिए, भेंट देन तेरे द्वार खड़े, अटल सिंहासन बैठी माता, सिर सोने का छत्र फिरे ।
बार शनिचर कुम कुम बरणी, जब लांगुर पर हुक्म करे, खड़क खप्पर त्रिशूल हाथ लिए, रक्तबीज को भस्म करे ।
शुम्भ निशुम्भ पछाड़े माता, महिषासुर को पकड़ दले, कुपित हो कर दानव मारे, चण्ड मुण्ड सब चूर करे ।
आदित बार आदि का राजत, अपने जन का कष्ट हरे, जब तुम देखो दया रूप हो, पल में संकट दूर करे ।
सौम्य स्वभाव धरो मेरी माता, जन की अरज कुबूल करे, सिहं पीठ पर चढ़ी भवानी, अटल भुवन में राज करे ।
दर्शन पावें मंगल गावें, सिद्ध साधक तेरी भेंट धरें, ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे, शिव शंकर हरी ध्यान धरे ।
इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती, चँवर कुबेर डुलाय रहे, जय जननी जय मातु भवानी, अटल भवन में राज करे ।
संतन प्रतिपाली सदा खुशाली, जय काली कल्याण करे, मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े ।