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Durga Devi Sanskrit Stotras - Prayers

Mata Shakti

Goddess Durga called as mother (Maa) and it means inaccessible in Hinduism. Durga has thousands of names. Her famous names are Chandi, Bhawani, Jagdamba, Shakti etc. According to Durga Sapatsati, Goddess Durga contains the powers (Shakti) of other great deity. Durga is form of Goddess Parvati. Durga's other forms are ten great powers called "Mahavidhya". Mahakali consider as first Mahavidhya in Hindu mythology. Bhawani rides on lion which symbol of religion. Devi has trident, sword to prevent her devotee from all obstacles. "Devi Mahatamya" is a great Hindu literature of Devi Durga. "Durga Sapatsati" is part of "Devi Mahatamya" with 700 sholoka. "Durga Sapatsati" is a mythological book about Mata Jagdamba. Vaishno devi is form of Mata Durga. In Hinduism Vaishno devi yarta (trip) considered very holly and important. Recitation of her names gives whole happiness in life. Narvana mantra has three beej of Goddess, Aim for Saraswati, Hrim for laxmi and Klim for kaali. Mata Durga's Narvana chant is

"Aim Hrim Klim Chamundaye Vicche - ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाये विच्चे"

Hindu Goddess Bhagwati Durga Religious Prayer - Stotras For Durga Devi

Durga Stotram

न तातो न माता, न बन्धुर्न दाता, न पुत्रो न पुत्री न भ्रत्यो न भर्ता, न जाया न विद्या न वर्तिमम्मेव गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि

Durga Dawtrinsh Namavali Strotra - दुर्गा दव्त्रींश नामावली स्त्रोत्र

Durga Namavali

Bhawani Ashtkam (octet) - भवानी अष्टकम

Bhawani aashtkam

Chandika Ashtkam (octet) - चंडिका अष्टक

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Tantrokt Devi Suktam - तन्त्रोक्तं देवी सूक्तं

Tantrokt Devi Suktam

Shri Durga Sapt Shloki Stotra - श्री दुर्गा सप्त श्लोकी स्त्रोत्र

ॐ अस्य श्री दुर्गा सप्त श्लोकी स्त्रोत्रमंत्रस्य नारायण ऋषिः अनुष्टुप छन्दः श्री महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वत्यो देवताः श्री जगदम्बा प्रीत्यर्थे पाठे विनियोग: |
ज्ञानिनामपि चेतांसी देवी भगवती ही सा, बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ||१||
(प्रथम चरित्र - प्रथम अध्याय) (प्रथम चरित्र मुख्य बीज - "ऐं") (मुख्य देवता - महाकाली)
दुर्गे स्मर्ता हरसि भीतिमशेष जन्तोः स्वस्थे: स्मर्ता मतिमतीव शुभां ददासि, दारिद्रय दुख: हारिणी का त्वदन्या सर्वोपकार करणाय सदार्द चित्ता ||२||
(मध्यम चरित्र - चतुर्थ अध्याय) (मध्यम चरित्र मुख्य बीज - "ह्रीं") (मुख्य देवता - महालक्ष्मी)
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वाथ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||३||
(उत्तर चरित्र - एकादश अध्याय) (उत्तर चरित्र मुख्य बीज - "क्लीं") (मुख्य देवता - महासरस्वती)
शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्वस्यार्ती हरे देवी नारायणी नमोस्तुते ||४||
(उत्तर चरित्र - एकादश अध्याय) (उत्तर चरित्र मुख्य बीज - "क्लीं") (मुख्य देवता - महासरस्वती)
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्व शक्ति समन्विते, भयेभ्य स्त्राहि नो देवी दुर्गे देवी नमोस्तुते ||५||
(उत्तर चरित्र - एकादश अध्याय) (उत्तर चरित्र मुख्य बीज - "क्लीं") (मुख्य देवता - महासरस्वती)
रोगानशेषांपहंसी तुष्टा रुष्टा तु कामान सकलानभिष्टान, त्वामा श्रितानाम न विपन्नराणाम त्वामाश्रिता ह्रां शयताम प्रयान्ति ||६||
(उत्तर चरित्र - एकादश अध्याय) (उत्तर चरित्र मुख्य बीज - "क्लीं") (मुख्य देवता - महासरस्वती)
सर्व बाधा प्रशमनं त्रिलोक्य स्याखिलेश्वरी, एवमेव त्वया कार्यं अस्मद वैरी विनाशनम ||७||
(उत्तर चरित्र - एकादश अध्याय) (उत्तर चरित्र मुख्य बीज - "क्लीं") (मुख्य देवता - महासरस्वती)


इस सप्त श्लोकी स्त्रोत्र का पठन, सप्तशती के पठन के सदृश है | इसमें देवी के तीनो चरित्रों के श्लोको का समावेश है जो महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी की प्रसन्नता हेतु पठित किये जाते हैं | प्रथम चरित्र का पाठ महाकाली की प्रसन्नता के लिए किया जाता है पर इसका मुख्य बीज "ऐं" है जिसको महासरस्वती का बीज माना जाता हैं और उत्तर चरित्र का पाठ महासरस्वती की प्रसन्नता हेतु किया जाता है परन्तु इसका मुख्य बीज "क्लीं" है जो की महाकाली का बीज है | अस्तु इस रहस्य को ज्ञान नेत्र वाले लोग ही समझ सकते है | वस्तुत तीनो देवी शक्तियां एक ही शक्ति है जिनका सम्मिलित रूप ही माता दुर्गा है |


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