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Vishnu Aarti - Narshimha Aarti - SatyaNarayan Aarti

Shri Vishnu Aarti in Hindi, God Lakshmiramna Satyanarayan aarti, Narshiha aarati

Lord Vishnu is supreme deity of Hinduism. He is known as Lord Hari, Narayana and Jagdish also. Jagdish means God of the universe. Vishnu holds Sudarshana Chakra, Kaumodaki Gada and rides on bird Garuda and his abode is Ksheera Sagara known as the sea of milk. He consorts to Goddess Lakshmi and both theses deities care of the universe. Devotees worship him for happy, prosperous, and healthy life. Tenth incarnations of Lord Vishnu are Shri Matsya, Kurma, Varaha, Narsimha, Vamana, Parashurama, Shri Rama, Balrama, Krishna, and Kalki. The very famous Vishnu Aarti song is "Om Jai Jagdish Hare".
Lord Narasimha is the fourth incarnation of Lord Vishnu. He has a head of the lion and body of the human. He was appeared to destroy demon Hiranyakashap and saved his devotee Prahalad. Narshimha Jayanti is a big festival for him. "Jai Narshima Hare" is Aarati song of Lord Narshima which given below.
Lord SatyaNarayan is an incarnation of Lord Vishnu also. People worship and do fast to appease him. Satyanarayan Vart is a very famous religious ritual in India. "Jai Lakshmi Ramna Shri Jai Lakshmi Ramnaa" is the hymn and Aarti of Satyanarayan God.

God Vishnu Aarti - Narshima Aarti - Satyanarayan Aarati - विष्णु आरती

Vishnu Aarati

Vishnu Aarti - विष्णु आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी, जय जगदीश हरे, भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे, ॐ जय जगदीश हरे ।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का, सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का, ॐ जय जगदीश हरे ।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी, तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी, ॐ जय जगदीश हरे ।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी, ॐ जय जगदीश हरे ।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता, मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता, ॐ जय जगदीश हरे ।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति, ॐ जय जगदीश हरे ।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे, अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे, ॐ जय जगदीश हरे ।
विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा, श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, सन्तन की सेवा, ॐ जय जगदीश हरे ।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे, कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे, ॐ जय जगदीश हरे ।
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी, जय जगदीश हरे, भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे, ॐ जय जगदीश हरे ।


Narsimha Aarti

Narshiha Aarti - नरसिंह आरती

जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे, स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे |
जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे...
तुम हो दिन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी, अद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी |
जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे...
सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी, दास जान आपनायो, जिन पर कृपा करी |
जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे...
ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे, शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे |
जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे...

SatyaNarayan Aarti

Satyanarayana Aarti - सत्यनारायण आरती

जय लक्ष्मीरमणा श्री जय लक्ष्मीरमणा, सत्यनारायण स्वामी जनपातक हरणा । जय लक्ष्मीरमणा...
रत्नजड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे, नारद करत निराजन घंटा ध्वनि बाजे । जय लक्ष्मीरमणा...
प्रगट भये कलि कारण द्विज को दर्श दियो, बूढ़ो ब्राह्मण बनकर कंचन महल कियो । जय लक्ष्मीरमणा...
दुर्बल भील कठारो इन पर कृपा करी, चन्द्रचूड़ एक राजा जिनकी विपति हरी । जय लक्ष्मीरमणा...
वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दीनी, सो फल भोग्यो प्रभुजी फिर स्तुति कीनी । जय लक्ष्मीरमणा...
भाव भक्ति के कारण छिन-छिन रूप धर्यो, श्रद्धा धारण कीनी तिनको काज सर्यो । जय लक्ष्मीरमणा...
ग्वाल बाल संग राजा वन में भक्ति करी, मनवांछित फल दीनो दीनदयाल हरी । जय लक्ष्मीरमणा...
चढ़त प्रसाद सवाया कदली फल मेवा, धूप दीप तुलसी से राजी सत्यदेवा । जय लक्ष्मीरमणा...
श्री सत्यनारायणजी की आरती जो कोई नर गावे, कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ।
जय लक्ष्मीरमणा श्री जय लक्ष्मीरमणा, सत्यनारायण स्वामी जनपातक हरणा । जय लक्ष्मीरमणा...



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