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Jain Tirthankar Aarti - जैन तीर्थंकर आरती

Jain Tirthankar aarti in Hindi, Bhagwaan Aadinath aarti, Parasvanath aarti, Mahaveer Swami aarti.

Aadinath Bhagwan is first tirthankar in Jainism among twenty four tirthankaras. Lord Adinath known as Rishabh Dev and Adeshwara who is first God in Jain religion. He is known as incarnation of Lord Vishnu according Vishnu Purana, Markendaya Purana. The symbol of Rishabha is bull. God Adinath aarati songs are "Jai Jai Aarati Aadi Jinanda" and "Aarati Utaaru Aadinath Bhagwan Ki".
Parasvanath Bhagwan is twenty third tirthankar. He is known as Paras Prabhu, Parasva also. A hood of snakes over his head described in his idol, the snake known as Dharendra and Padmavati. Snake is symbol of him. Famous lyrics of aarties and hymn of Parasvanath are given below. "Main to Aarati Utaru re" and second mostly sung Parasnath aarti is "Jai Jai Aarti Parasv Jinanda".
Mahavir Bhagwan is twenty fourth and last tirthankar of current time in Jainism. Lord Mahaveera is as famous as Parasvanth among their devotees. He called Vardhamana, Veer Prabhu and Mahaveer Swami. He teaches live and let live. Lion is symbol of him. Famous hymns and aarati song with lyrics of Mahavir Swami, given below. First is "Om Jai Mahavir Prabho" and second aarati song is "Jai Sanmati Deva" and third is "Om Jay Mahaveer Prabhu".

Thirthankara Aarti Songs and Lyrics in Hindi - Adinath Aarati - Parasvanath Aarti - Mahavir Aarti

Rishabhdev Aarti - Adinath Aarati

Jin Rishabh Dev Aarti

Aadinath Bhagwan Aarti - आदिनाथ भगवान आरती

आरती उतारूँ आदिनाथ भगवान की, माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की,
रोम रोम पुलकित होता देख मूरत आपकी, आरती उतारूँ आदिनाथ भगवान की ।
प्रभुजी हम सब उतारें थारी आरती |
तुम धर्म धुरन्धर धारी, तुम ऋषभ प्रभु अवतारी, तुम तीन लोक के स्वामी, तुम गुण अनंत सुखकारी,
इस युग के प्रथम विधाता, तुम मोक्ष मर्म के दाता, जो शरण तुम्हारी आता, वो भव सागर तीर जाता,
हैं नाम हैं हजारों ही गुण गान की, तुम ज्ञान की ज्योति जमाए, तुम शिव मार्ग बतलाए,
तुम आठो कर्म नशाए, तुम सिद्ध परम पद पाये, मैं मंगल दीप सजाऊँ, मैं जगमग ज्योति जलाऊँ,
मैं तुम चरणों में आऊँ, मैं भक्ति में रम जाऊँ, मैं झूम झूम झूम नाचूँ करुँ आरती,
आरती उतारूँ आदिनाथ भगवान की ।


Parasvanath Aarti

Parasvanatha Aarti - पार्श्वनाथ भगवान आरती (1)

मैं तो आरती ऊतारूँ रे, पारस प्रभुजी की, जय-जय पारस प्रभु जय जय नाथ ।
बड़ी ममता माया दुलार प्रभुजी चरणों में, बड़ी करुणा है, बड़ा प्यार प्रभुजी की आँखों में,
गीत गाऊँ झूम-झूम, झम-झमा झम झूम-झूम, भक्ति निहारूँ रे, ओ प्यारा प्यारा जीवन सुधारूँ रे ।
मैं तो आरती ऊतारूँ रे, पारस प्रभुजी की, सदा होती है जय जयकार प्रभुजी के मंदिर में…
नित साजों की हो झंकार प्रभुजी के मंदिर में, नृत्य करूँ, गीत गाऊँ, प्रेम सहित भक्ति करूँ,
कर्म जलाऊँ रे, ओ मैं तो कर्म जलाऊँ रे, मैं तो आरती ऊतारूँ रे, पारस प्रभुजी की ।


Parasvanath Bhagwaan Aarti - पार्श्वनाथ भगवान आरती (2)

जय जय आरति पार्श्व जिनन्दा, अश्वसेन वामाजी के नंदा, ध्यावे नित नित होते आनन्दा
नील वरण कंचनमय काया, नाग नागिन प्रभुदर्श सुहाया, ध्यावे नित नित होते आनन्दा
समवसरण प्रबु आप बिराजे तीनो लोक में दुंदुभी बाजे, देश बनारस के सुखकंदा, ध्यावे नित नित होते आनन्दा
कमठ काष्ट के ढेर जलाए, प्रभुजी जलते नाग बचाए, नाग वो जन्मे पद धरणेन्द्रा, ध्यावे नित नित होते आनन्दा
मेघमाली धन जल बरसावे, नासाग्रे प्रभु डूबन आवे, पद्मावती प्रभु चरण ऊंचावे, मेघमाली समकित ले अभिनंदा
रत्नों भरी आरति उजवावे, धरणेन्द्र पद्मावती आरति गावे, इन्द्र इन्द्राणीयां हर्ष भरन्दा, ध्यावे नित नित होते आनन्दा
चिंतामणीजी की आरति गावे, सो नर नारी अमर पद पावे, आत्मा निर्मल शुद्ध करन्दा, ध्यावे नित नित होते आनन्दा |


Mahaveer Swami Aarti

Mahaveera Swami Aarti - महावीर स्वामी आरती (1)

ऊं जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो, जग-नायक सुखदायक, अति गंभीर प्रभो । ऊं जय...
कुण्डलपुर में जन्में त्रिशला के जाए, पिता सिद्धार्थ राजा, सुर नर हर्षाए | ऊं जय...
दीनानाथ दयानिधि हो मंगलकारी, स्वामी हो मंगलकारी, जगतहित संयम धारा, प्रभु पर उपकारी | ऊं जय...
पापाचार मिटाया, सत्पथ दिखलाया, दया धर्म का झंडा, जग में लहराया | ऊं जय...
अर्जुनमाली, गौतम, श्री चन्दनबाला, पार जगत से बेडा, इनका कर डाला | ऊं जय...
पावन नाम तुम्हारा, जग तारणहारा, निश दिन जो नर ध्यावे, कष्ट मिटे सारा | ऊं जय...
करूणासागर, तेरी महिमा है न्यारी, ज्ञान मुनि गुण गावे, चरणन बलिहारी | ऊं जय...


Mahaveer Swami Bhagwaan Aarti - महावीर स्वामी आरती (2)

जय सन्मति देवा, प्रभु जय सन्मति देवा, वर्द्धमान महावीर वीर अति, जय संकट छेवा । ऊँ जय सन्मति देवा...
सिद्धार्थ नृप नन्द दुलारे, त्रिशला के जाये, कुण्डलपुर अवतार लिया, प्रभु सुर नर हर्षाये | ऊँ जय सन्मति देवा...
देव इन्द्र जन्माभिषेक कर, उर आनंद भरिया, रुप आपका लख नहिं पाये, सहस आंख धरिया । ऊँ जय सन्मति देवा...
जल में भिन्न कमल ज्यों रहिये, घर में बाल यती, राजपाट ऐश्वर्य छोड़ सब, ममता मोह हती । ऊँ जय सन्मति देवा...
बारह वर्ष छद्मावस्था में, आतम ध्यान किया, घाति-कर्म चूर-चूर, प्रभु केवल ज्ञान लिया । ऊँ जय सन्मति देवा...
पावापुर के बीच सरोवर, आकर योग कसे, हने अघातिया कर्म शत्रु सब, शिवपुर जाय बसे । ऊँ जय सन्मति देवा...
भूमंडल के चांदनपुर में, मंदिर मध्य लसे, शान्त जिनेश्वर मूर्ति आपकी, दर्शन पाप नसे । ऊँ जय सन्मति देवा...
करुणासागर करुणा कीजे, आकर शरण गही, दीन दयाला जगप्रतिपाला, आनन्द भरण तु ही । ऊँ जय सन्मति देवा...


Mahaveera Swami Aarti - महावीर स्वामी आरती (3)

ॐ जय महावीर प्रभु, स्वामी जय महावीर प्रभु, कुंडलपुर अवतारी, त्रिशलानंद विभो, ॐ जय महावीर...
सिद्धार्थ घर जन्में, वैभव था भारी, स्वामी वैभव था भारी, बाल ब्रह्मचारी व्रत, पाल्यो तपधारी, ॐ जय महावीर...
आतम ज्ञान विरागी, समदृष्टि धारी, माया मोह विनाशक, ज्ञान ज्योति धारी, ॐ जय महावीर...
जग में पाठ अहिंसा, आप ही विस्तारयो, हिंसा पाप मिटा कार, सुधर्म परिचारयो, ॐ जय महावीर...
यही विधि चाँदनपुर में, अतिशय दर्शायो, ग्वाल मनोरथ पूरयो, दूध गाय पायो, ॐ जय महावीर...
प्राणदान मंत्री को, तुमने प्रभु दीना, मंदिर तीन शिखर का, निर्मित है कीना, ॐ जय महावीर...
जयपुर नृप भी तेरे, अतिशय के सेवी, एक ग्राम तिन दीनों, सेवा हित यह भी, ॐ जय महावीर...
जो कोई तेरे दर पर, इच्छा कर जावे, धन, सुत सब कुछ पावै, संकट मिट जावै, ॐ जय महावीर...
निश दिन प्रभु मंदिर में, जगमग ज्योति जले, हरि प्रसाद चरणों में, आनंद मोद भरै, ॐ जय महावीर...

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