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Padmavati Aarti - पद्मावती आरती

Jain Padmavati aarti in Hindi, Jain Goddess Padmavati Mata aarti

Padmavati Devi is the incarnation of goddess Lakshmi. She is protective goddess of Parasvanath who is 23th tirthankara in Jainism. She is very famous deity in Jainism and Hinduism. People worship her for attract wealth and prosperity. Worship of Padmavati consider very fruitful for prosperity. Jain do fast and worship on Friday for getting her blessings.
Dharenendra called husband of Mata Padmawati, both are called protective deities (Adhisthayak Dev) of Parasvnath. According to Jainism, ages ago, Parasvanatha try to save two snakes from the Kamath, although he could not succeed but due to Parasva, they took re birth as deities called Dharendra and Padmavati. And, in the next birth, they saved Parasvanatha from obstacles of devil Meghmaali (rebirth of Kamath).

"Main To Aarti Utaru Re, Padmavati Mata Ki" is very peaceful and nice aarati song of Padmavati Devi.

Jain Padmavati Aarti Song and Lyrics - Padmavati aarti in Hindi

The Goddess Padmavati is a deity in Hinduism also, the Tiruchanur town is famous for Padmavathi Ammavari Temple. "ॐ ह्रीं पद्मावत्ये नमः" is very famous chant of devi Padma. Devotee should start mantra jaap from Friday, and should be recited 108 times daily in morning for getting grace and boon of mata.

Parshav Padmavati Aarati

Padmavati Mata Aarti - पद्मावती आरती

मैं तो आरती उतारूँ रे, पद्मावती माता की,
जय जय माँ पद्मावती, जय जय माँ |
सदा होती है जयजयकार, माँ के मंदिर में,
लागी भक्तन की भीड़ अपार, माँ के मंदिर में,
पुष्प लाओ, धूप जलाओ, स्वर्णमयी दीप लाओ,
आरती उतारो रे, हो सब मिल आरति उतारो रे ।
मैं तो आरती उतारूँ रे...
पाश्र्व प्रभुवर की शासन देवी, सब संकट हरणी,
देव धरणेन्द्र की यक्षिणी, तुम मंगल करणी,
भक्त जब पुकारते, संकट को तारती,
महिमा को गाएं तेरी, हो सब मिल महिमा को गावें तेरी ।
मैं तो आरती उतारूँ रे...
पाश्र्व प्रभुवर के मुख से जब मंत्र नवकार सुना,
बनें पद्मावती धरणेन्द्र, उपसर्ग दूर किया,
स्थल वह अहिच्छत्र, तब से है जग प्रसिद्ध,
पावन परम पूज्य है, हो देखो वो पावन परम पूज्य है ।
मैं तो आरती उतारूँ रे...
रोग, शोक, दरिद्र, नाशें, प्रेतादि की बाधा,
धन-संपत्ति सुत देकर, पूरी करें वाञ्छा,
सुन ले आज फिर पुकार, भक्त खड़े तेरे द्वार,
अतुल शक्ति की धारिणी, हो तुम हो अतुल शक्ति की धारिणी ।
मैं तो आरती उतारूँ रे...
माँ सहस्रनाम से तेरी, करते जो आराधना,
गोदी भरते जो माँ तेरी, पूरी हों सब कामना,
ममतामयी मेरी मात, मैं करू एक आश,
जीवन प्रकाशमान हो, माँ मेरा भी जीवन प्रकाशमान हो ।
मैं तो आरती उतारूँ रे...



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