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Krishna Aarti - Khatu Shyamji Aarti - कृष्णा आरती

Lord Krishna Aarti in Hindi, Khatu Shyamji Aarti, Shyam Aarati

Lord Krishna is incarnation of God Vishnu. He is deity of Dwapara ages, symbol of true love and friendship. He had a flute and great flute player. He married with Radha and Rukmani and consort to sixteen thousands other queens. He holds the Sudarshana Chakra. Krishna Bhagwaan called Vasudeva, Shyam, Kunjbihari and Girdhar, Krishnamurari also. Krishna worshipped by all over the world in various forms like Baal Krishna, Laddu Gopala (the form of child), Jaganatha and Venkateshwara and with Krishna Radha combined idol. The very pleasant and dulcet Krishna aarti song "Aarati Kunjbihari Ki, Shri Girdhar Krishnamurari Ki" given below.

Khatu Shyamji is originally son of Ghatotkacha and manifestation of Barbarika. He got boon from Lord Krishna to be known by Krishna's name Shyam so he called Khatu Shyamji. KhatuShyamji is pilgrimage village in Sikar district in Rajasthan state. The famous Khatu Shyam aarti song with lyrics "Om Jai Shri Shyam Hare" given below for his devotees.

Krishna Aarti Song with Lyrics - Khatu Shyamji Aarati in Hindi

Krishna Aarti

Krishna Aarti - कृष्णा आरती

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की,
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला, श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आँगन नंदलाला,
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली, कि बन में ठाढ़े बनमाली,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की |
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ।
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं, गगन सों सुमन रासि बरसै,
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग, अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ।
जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा, स्मरन ते होत मोह भंगा,
बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ।
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू, चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू,
हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद, टेर सुन दीन भिखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ।
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की |


Khatu Shyamji Aarti

Khatu Shyamji Aarti - खाटू श्यामजी आरती

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे, खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे । ॐ जय श्री श्याम हरे...
रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे, तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े । ॐ जय श्री श्याम हरे...
गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे, खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले । ॐ जय श्री श्याम हरे...
मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे, सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे । ॐ जय श्री श्याम हरे...
झांझ कटोरा और घड़ि़यावल, शंख मृदंग धुरे, भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे । ॐ जय श्री श्याम हरे...
जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे, सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे । ॐ जय श्री श्याम हरे...
श्री श्याम बिहारी की आरती, जो कोई नर गावे, कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे । ॐ जय श्री श्याम हरे...
तन मन धन सब कुछ है तेरा, हो बाबा सब कुछ है तेरा, तेरा तुझको अर्पण, क्या लोग मेरा । ॐ जय श्री श्याम हरे...
जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे, निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे । ॐ जय श्री श्याम हरे...




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