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Jain Aarti - जैन आरती

Jain aarti in Hindi, Shri Panch Parmeshthi aarti, Mangal Dipak aarati.

Panch Parmeshthi aarti - This is combined Jain devotional hymn. Devotee sing this song for tirthankaras, Siddha, Muni or monks, Aacharya and Upadhyay. In this aarati a devotee worship to all monks, deities and tirthankaras. The lyrics of Panch Parmeshthi aarati is "Yah Vidhi Mangal Aarti ki Jai, Panch Param Pad Bhaj Sukh Leeje".

Mangal Deepak aarti "Divo Re Divo Prabhu Manglik Deevo" is famous aarati song for Jain deities which is singing in every Jain temple.

Jain Aarti Song and Lyrics - Jain aarati in Hindi - Panch Parmeshthi Aarti - Mangal Dipak Aarati


Jain Panch Parmeshthi Aarti

Panch Parmeshthi Aarti - श्री पंच परमेष्टि प्रभु आरती

यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |
पहेली आरती श्री जिनराजा, भव दधि पार उतर जिहाजा
यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |
दूसरी आरती सिद्धन केरी, सुमरण करत मिटे भव फेरी ।
यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |
तीजी आरती सूर मुनिंदा, जनम मरन दुःख दूर करिंदा ।
यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |
चोथी आरती श्री उवझाया, दर्शन देखत पाप पलाया ।
यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |
पाचवी आरती साधू तिहारी, कुमति विनाशक शिव अधिकारी ।
यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |
छट्टी ग्यारह प्रतिमा धारी, श्रावक वंदो आनद करी ।
यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |
सातवी आरती श्री जिनवाणी, ज्ञानत सुरग मुक्ति सुखदानी ।
यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |
आठवी आरती श्री बाहुबली स्वामी, करी तपस्या हुए मोक्ष गामी ।
यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |
जो यह आरती करे करावे, सौ नर मन वांछित फल पावे।
यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |
सोने का दीप कपूर की बाती, जगमग ज्योति जले सारी राती ।
यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |
संध्या कर के आरती की जे, अपनों जनम सफल कर लीजे ।
यह विधि मंगल आरती की जय, पंच परम पद भज सुख लीजे |


Mangal Dipak Aarti - मंगल दीपक आरती

Mangal Dipak Aarti - मंगल दीपक आरती

दीवो रे दीवो प्रभु मंगलिक दीवो, आरती उतारण बहु चिरंजीवो ।
सोहामणुं घेर पर्व दीवाळी, अम्बर खेले अमरा बाळी ।
दीपाळ भणे एणे कुल अजुआळी, भावे भगते विघन निवारी ।
दीपाळ भणे एणे ए कलिकाळे, आरती उतारी राजा कुमारपाळे ।
अम घेर मंगलिक तुम घेर मंगलिक, मंगलिक चतुर्विध संघने होजो


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