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Interesting Astrology Tips and Observations

astrology knowledge full observations and facts of meditation and astrology,
"Swarodaya Shastra" and other "Vedic Sutra". Read this page in English.


Meditation tips - Hindi Astrology tips - Interesting facts about astrology - Swarodaya tips

रोचक और ज्ञान पूर्ण टिप्पणिया एवं तथ्य - ज्योतिष, ध्यान, स्वरोदय विज्ञानं और वैदिक सूत्र

ध्यान तथ्य

१. पोराणिक हिन्दू मान्यता के अनुसार, ध्यान एक ऐसा ज्ञान है जो पुन: उसी अवस्था से शुरु होता है जहाँ पर साधक ने इस जन्म में या पूर्व जन्म में रोक दिया था | ध्यान का बिंदु कालातीत है और वो सतत यात्रा करता है | इसलिए कोई साधक ध्यान की उपलब्धि कुछ ही समय में कर लेता है तो किसी को बहुत समय लग जाता है |


२. ध्यान के चरम बिंदु समाधी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते है, जैसे समाधी के दोरान साधक का चेहरा खून के चेहरे पे बहाव के कारण रक्तिम वर्ण का हो जाता है क्यों कि ध्यान के दोरान खून का बहाव मस्तिष्क में सबसे ज्यादा होता है | वैज्ञानिक तरीके से देखे तो ध्यान के दोरान गहरी सांस होने के कारण एवं संपूर्ण ध्यान मस्तिष्क पर होने के कारण प्राण वायु (ओक्सिज़न) की मात्रा मस्तिष्क में सबसे ज्यादा होती है, इसलिए खून का बहाव मस्तिष्क की और ज्यादा होता है |


३. मार्केंडय पुराण के अनुसार साधक को न तो सिद्धियों में आशक्ति रखनी चाइये न ही इनका उपयोग अपने स्वार्थ हेतु या अपना अहंकार व्यक्त करने हेतु करना चाइये, अन्यथा ये शक्तिया लुप्त हो जाती है |


४. स्व सम्मोहन एवं ध्यान में मूलभूत अंतर यह है की स्व सम्मोहन में चेतन मन से अवचेतन की और जाया जाता है अर्थात चेतन मन पर साधक का वश नहीं रहता और ध्यान एक कला है अवचेतन में रहते हुए पूर्ण चेतन एवं जागरूक रहने की |


स्वरोदय शास्त्र की रोचक टिप्पणिया


१. स्वरोदय के अनुसार भोजन और पानी सही स्वर चलते रहने की अवस्था में लेने से स्वास्थ्य ठीक रहता है, दायीं सांस चलते रहने की अवस्था में पाचन तंत्र सही और दुरस्त रहता है |


२. अगर कोई व्यक्ति किसी सामान्य बीमारी से ग्रसित है जैसे जुकाम, बुखार, रक्तचाप, मानसिक परेशानी, सिरदर्द आदि तो व्यक्ति को स्वयं का स्वर बदल देना चाइये | स्वर बदल देने से कुछ समय में बीमारी स्वत: ठीक हो सकती है | स्वर बदलने के लिए व्यक्ति को जो स्वर चल रहा है उसी करवट ले कर कुछ समय लेटना चाइये जैसे अगर सरदर्द है और दायाँ स्वर चल रहा है तो मतलब उष्णता के कारण सरदर्द है अत: शीतलता प्राप्त करने के लिए दायीं करवट लेट कर स्वर बदलना चाइये |


रोचक ज्योतिष तथ्य


१. जन्म कुंडली में बलशाली सूर्य की पहचान है मजबूत शारीरिक सरंचना, पिता से अच्छे सम्बन्ध और भोजन में नमक ज्यादा लेना |


२. अगर जन्म कुंडली में मंगल अकेला छठे घर में हो और उस पर किसी अन्य ग्रह की दर्ष्टि न हो तो उस व्यक्ति के पिता के दो भाई होते है |


३. अगर व्यक्ति की जन्म तारीख और वर्ष जन्म पत्रिका के ग्रहों के आधार पर निकालना हो तो शनि, सूर्य और चन्द्र की स्थति और इन ग्रहों के अक्षांश की गणित करके निकाली जा सकती है | सामान्य नियम है की शनि एक राशी में ३० वर्ष के बाद आता है, सौर गणना के अनुसार सूर्य निश्चित समय तक एक राशी में रहता है और चन्द्रमा एक राशी में लगभग ढाई दिन तक रहता है |


४. पाराशर ज्योतिष के अनुसार महादशा के समय महाद्शानाथ की अंतरदशा अगर बुरी जाती है तो बाकि की अंतरदशा अच्छी जाती है |

५. ज्योतिष के अनुसार बीमारियाँ बुरे ग्रहों के बलशाली होने से एवं शुभकारी ग्रहों के बलहीन होने के कारण आती है | विशेष उपायों से इसे ठीक किया जा सकता है | उदाहरण के तौर पर अगर किसी को लीवर या किडनी की समस्या है तो निश्चितः तौर पर उसकी जन्म कुंडली में चोथा भाव बिगड़ा हुआ होगा एवं गुरु बलहीन हो कर पाप पीड़ित होगा तो गुरु के कारक पीले चने खाने से एवं पिता और दादा का सम्मान करने से तथा ललाट पर केसर या हल्दी तो तिलक करने से इस समस्या का कुछ हद तक निदान हो सकता है | यहाँ पर पीला चना, पिता, दादा, पीला तिलक, केसर, हल्दी सब गुरु के कारक तत्व है जो उसको बल प्रदान करते है |


६. अगर जन्म कुंडली में मंगल अकेला दसवे भाव में हो तो व्यक्ति गुस्से वाला होता है, जीवन में तीन घरों का स्वामी बन सकता है और चर्म रोग से पीड़ित हो सकता है |

७. ज्योतिष के अनुसार यदि पुरुष का जन्म प्रात: काल या दोपहर १२ बजे के लगभग या आधी रात को १२ बजे के लगभग होता है तो वो व्यक्ति भाग्यशाली होता है |


रोचक वैदिक सूत्र


१. देवी भागवत एवं मार्केंडय पुराण के अनुसार यदि स्त्री और पुरुष समागम विशेष सम रात्रि या विषम रात्रि को करे तो संतान भाग्यशाली, पुण्यवान होती है | गर्भ धारण हेतु ८ वी रात्रि से १६ वी रात्रि का समय ग्राह्य है | सम एवं विषम रात्रि की गणना के लिए रजस्वला होने के पहले दिन की रात्रि को विषम एवं अगली रात्रि को सम गिने तदुपरांत इसी प्रकार आगे गणना करे |
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