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How to attract money - Ancient Vedic Tips - Appease Lakshmi

How to appease Lakshmi Goddess of wealth

"या श्री स्वयं सुकृतिनाम भवनेषु अलक्ष्मी पापत्म्नाम कृतधियं ह्रदयषु बुद्दि
क्षर्द्वा सतां कुलजन प्रभवस्य लज्जा तां तवाम नता स्म परिपालय देवी विश्वं"

How to be rich according to Hinduism and Vedic sutra ?
Mean who exist in Form of wealth (Shree) in people who associated with good work (action/karma). Who exist in form of poverty (Alaxmi) in people associated with sin (bad work). Who exist in form of wisdom (Buddi) in people who are innocent and humble. Who exist in form of devotion (Sharddha) in people associated with truth and loyalty. Who exist in form of decency (Lajja) in people who are noble and gentle. We bow and worship that Goddess Devi who rear the world.
Goddess Mahalaxmi is goddess of wealth and prosperity. Dipavali is great festival to appease Lakshmi and attract money and wealth. Here is some Vedic sutra to appease Goddess of money. According to Indian scriptures, Mahalakshmi worship or Diwali worship is very important on night of dipavali. Know how to do Lakshmi Pooja at the festival of Diwali.
How to attract money and wealth

Hindi article on "how to appease Goddess Lakshmi" and How to worship Lakshmi for being wealthy

How to worship and appease Lakshmi - कैसे मनाये लक्ष्मी को ?

कालरात्री दीपावली भगवती राज राजेश्वरी महालक्ष्मी, जो इस विद्रूप - सद्रूप जगत का आदि कारण हैं, कि वंदन एवं पूजन की रात्रि है | महालक्ष्मी को मनाने हेतु एवं उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनुष्य आदिम काल से उनकी पूजा आराधना कर रहा है, परन्तु वो चंचला भगवती अपने कटाक्षो से निमेश मात्र का दृष्टिपात मात्र उन पुण्यशाली मनुष्यों पर ही करती हैं, जो उनमें श्रद्धा भाव रखते हुए भी धन के प्रति मोहासक्त नहीं होते | अस्तु कहा भी गया है -

"या श्री स्वयं सुकृतिनाम भवनेषु अलक्ष्मी पापत्म्नाम कृतधियं ह्रदयषु बुद्दि क्षर्द्वा सतां कुलजन प्रभवस्य लज्जा तां तवाम नता स्म परिपालय देवी विश्वं"
यानि वो लक्ष्मी पुण्यात्माओं के यहाँ स्वयं श्री रूप में, पापियों के यहाँ दरिद्रता रूप में निवास करती हैं | केवल मात्र बुद्धि एवं मेहनत के बल पर धन की प्राप्ति संभव नहीं, पुण्य कर्म की उपयोगिता यहाँ स्वत: सिद्ध हो रही है.


पोराणिक शास्त्रों में लक्ष्मी जी के स्वयं के वचन हैं, जिसका जो पालन करता है, लक्ष्मी उस पर अवश्य अनुग्रह करती है | वचन अनुसार "जो व्यक्ति स्व धर्म (स्वयं के कर्तव्य धर्म एवं जाति विशेष का धर्म) का पालन नहीं करता, उस पर मैं (लक्ष्मी) प्रसन्न नहीं होती हूँ". "जो व्यक्ति उधमी एवं पुरुषार्थी होकर नीतिगत प्रकार से धनार्जन करता है, उसके यहाँ सदा मेरा सन्निधान बना रहता है". "जहाँ नित्य नीमित्तिक कर्म (शयन, भोजन, स्नान, संध्या) समय पर किये जाते हैं, जिस घर को नित्य जल से साफ़ किया जाता है एवं सूर्योदय से पूर्व जहाँ के मनुष्य शयन से जाग जाते हैं, वो मेरा प्रिय स्थान है". "जो मनुष्य धन का सिर्फ संचय करता है, धर्म एवं अन्य मनुष्यों हेतु उसका कुछ भाग दान स्वरुप त्याग नहीं देता, उसकी धन सम्पदा भी चलायमान हो जाती हैं".

मार्केंडया पुराण में ब्रह्माजी ने अलक्ष्मी (लक्ष्मी की बड़ी बहिन एवं दरिद्रता की देवी) के पुत्र दु:सह को स्वयं कहा हैं, की जिस घर में प्राणियों में आपस में प्रेम भाव न हो, जहाँ गुरु, पिता, देवता एवं स्त्री जाती का अपमान हो, जहाँ संध्या काल में दीपक या अग्नि न जलाई जाये, जहाँ सांड, चन्दन, मोर का जोड़ा, वीणा, दर्पण, शहद, घी एवं ताम्बे का पात्र नहीं हो, जहाँ जिस घर को पवित्रता पूर्वक ना रखा जाये, जहाँ एक रात से ज्यादा मुर्दा पड़ा रहे एवं जहाँ भूमि में मनुष्य की हड्डी इत्यादी हो, वहां तुम (दु:सह) स्वेच्छा से विचरण करो एवं अन्य देत्यों का भी वहां वास हों. ऐसे घरों के मनुष्यों को दबाने की तुम में पूर्ण शक्ति होगी. अत: बुद्धिमान मनुष्यों को इन पाप लक्षणों को ध्यान में रखकर उचित रीति का पालन करना चयिये ताकि अलक्ष्मी एवं उसकी संतानों का वहां वास न होने पाए.

कैसे करें महालक्ष्मी पूजा या दीपावली पूजा


लक्ष्मी जी की पूजा का सर्वश्रेष्ठ काल दीपावली के वर्षभ या सिंह लग्न (स्थिर लग्न) एवं गोधुली हैं, तब सर्व प्रथम गणेश लक्ष्मी एवं विष्णु का विग्रह या तस्वीर स्थापित करें, तदन्तर गणेश जी का ध्यान, आवाहन कर पंचोपचार पूजन करें. उसके बाद विष्णु जी इसी प्रकार पूजन करके नवग्रह का पूजन करना चायिये, फिर भगवती लक्ष्मी का षोडोपचार पूजन करें. लक्ष्मी जी को कमल पुष्प प्रिय हैं इसलिए कमल पुष्प या कमल गट्टा अर्पित करें, फिर महासरस्वती (कलम) और महाकाली (दवात) का भी पूजन करें. जैसे शास्त्र रीति से जहाँ पति का सम्मान ना हो वहां स्त्री का जाना वर्जित हैं, वैसे ही लक्ष्मी पति विष्णु के पूजन के बिना लक्ष्मी का आगमन संभव नहीं हैं, अत: श्री विष्णु का पूजन करके पुरुष सूक्त (विष्णु हेतु), एवं लक्ष्मी सूक्त, श्री सूक्त के यथा शक्ति पाठ करें, सारी रात लक्ष्मी के किसी मंत्र का जाप करें और पूजन जाप संकल्प पूर्वक उनको समर्पित कर दें.


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लक्ष्मी का वाहन उल्लू होता हैं, पर लोकोक्ति में उल्लू मूर्ख को कहा जाता हैं, तात्पर्य यह की जब इंसान की गर्दन धन के बाहुल्य में गर्व से उल्लू की गर्दन की भांति तन जाती है, तब लक्ष्मी उसके सिर पर चढ़ बैठती हैं, जैसे उल्लू दिन को नहीं देख पाता, वैसे वो इंसान उल्लू की भांति मधांध हो जाता है और अपना विनाश कर बैठता हैं, तात्पर्य यह की विनम्रता का भाव जिस मनुष्य में नहीं होता, उसका विनाश निश्चित हैं.


कुछ विशेष उपाय, जिन से व्यक्ति पर लक्ष्मी को कृपा बनी रहती हैं.


अमावस्या को अपने पुरे घर की साफ़ सफाई करें, एवं बिना काम की वस्तुएं हटा देवें.
प्रत्येक अष्टमी को घर में गुग्गल का धूप करें.
घर के मुख्य द्वार के ऊपर, अंदर एवं बाहर दोनों तरफ, बीच में गणपति की तस्वीर या मूर्ति लगानी चाईए, क्योंकि गणपति की दृष्टि में अमृत होता है और पीठ में दरिद्रता का वास कहा गया है, दोनों तरफ लगाने से अमृत दृष्टि का प्रभाव रहता है.
अपने घर में चन्दन, मोर का जोड़ा, वीणा, दर्पण, शहद, घी एवं ताम्बे का पात्र हमेशा रखें यह अलक्ष्मी एवं उसकी संतानों को दूर रखता हैं.
अपने जीवन में एक सु नियम बनाये, एक नियम का किसी भी हालत में पालन बहुत सी मुसीबतों को दूर रखता हैं, जैसे नित्य एक रोटी गाय एवं एक रोटी कुत्ते को देने के नियम से भाग्य के द्वार को खोलने से कोई नहीं रोक सकता.

अगर किसी मंदिर में नीचे आँगन में गिरा हुआ सिक्का मिल जाएँ तो अपने गल्ले में लाल कपडे में बांध कर रखें. अगर देव मूर्ति से कोई पुष्प पतित होकर आप के सामने या आप के ऊपर गिरे तो बहुत अच्छा संकेत हैं, उस पुष्प को अपने पूजा घर या धन स्थान में लाल कपडे में रखे.
नित्य श्री सूक्तं या लक्ष्मी सूक्तं का पाठ करें, तो लक्ष्मी का वहां सदा सन्निधान बना रहता हैं.
गीता के दसवें अध्याय में कहा गया हैं की वृक्षों में मैं (कृष्ण) पीपल हूँ, शास्त्रों में पीपल को श्री हरी का स्वरुप बताया गया हैं, और शास्त्र अनुसार प्रत्येक पूर्णिमा को प्रात: १० बजे लक्ष्मी जी का वहां आगमन होता हैं, इसलिए वहां नित्य नियम से या फिर पूर्णिमा को १० बजे जल देवें, लक्ष्मी जी का दृष्टिपात सहज हो जाता हैं.
अपने घर में कुछ स्थान कच्चा (मिट्टी युक्त) रखने से शुक्र ग्रह (स्त्री, वैभव एवं धन का अधिपति) बलि होता हैं, उसका वास होता हैं, अत: स्त्री जाती वहां स्वस्थ एवं वैभव का वहां बाहुल्य रहता हैं.
झाड़ू अलक्ष्मी का प्रतीक हैं, अत: झाड़ू का एक निश्चित स्थान रखे एवं घर में दो बार कभी झाड़ू ना लगाये एवं नमक को भी खुल्ला न रखें ये वैमनस्य करा सकता हैं.
ईशान कोण, आग्नेय कोण या पूर्व दिशा में धन की अल्मानी ना रखें, ये सर्वदा धन का नाश करती हैं, नेश्रित्य कोण या दक्षिण दिशा में उत्तरमुखी अलमारी रखने से धन की बढ़ोतरी होती हैं.
ईशान में मंदिर या पूजा घर पूर्व मुखी बनाये एवं नित्य दीपक जलाये.

दीपावली पर गणेश, विष्णु एवं लक्ष्मी के पूजन का अर्थ हैं की विष्णु जो बल पराक्रम एवं कर्म के अधिष्ठाता हैं, वो मनुष्य को पुरुषार्थ की शक्ति देते हैं और जो बुद्धि के अधिष्ठाता हैं, वो गणपति उसकी बुद्धि एवं धन को संन्मार्ग की ओर प्रेरित करते हैं और भगवती महालक्ष्मी उस क्रिया निष्पादन का फल प्रदान करती हैं.


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